US Iran War: ईरान जंग पर छलका डोनाल्ड ट्रंप का दर्द, NATO का साथ न मिलने पर बोले- हमें किसी की जरूरत नहीं
Donald Trump Angry on NATO: डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका अभी ईरान के साथ चल रहे संघर्ष से पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने यूरोपीय देशों पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं है और वह अपने दम पर हालात संभाल सकता है।
Donald Trump Angry on NATO: ईरान से जुड़े तनाव के मुद्दे पर अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच मतभेद साफ़ नजर आ रहे हैं। राष्ट्रपति Donald Trump उन देशों की खुलकर आलोचना कर रहे हैं जो इस वॉर में अमेरिका का सपोर्ट नहीं कर रहे हैं और उनका रुख काफी सख्त बना हुआ है। दूसरी ओर, अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी देश सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाए रखते हुए कूटनीतिक समाधान और शांति की दिशा में प्रयासों पर जोर दे रहे हैं। ब्रिटेन के बाद अब France और Canada ने भी ईरान के खिलाफ किसी सैन्य अभियान में शामिल न होने का निर्णय लिया है।
नाटो देशों से नाराज हैं डोनाल्ड ट्रंप
Emmanuel Macron ने साफ कहा है कि मौजूदा स्थिति में उनका देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए किसी भी सैन्य अभियान में शामिल नहीं होगा। उन्होंने यह बात पेरिस में हुई नेशनल सिक्योरिटी एंड डिफेंस काउंसिल की बैठक के दौरान कही। वहीं, Donald Trump ने मैक्रों पर निशाना साधते हुए कहा कि वह जल्द ही सत्ता से बाहर हो सकते हैं।
ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विरोध करते हुए अपने पद से इस्तीफा देने वाले अमेरिकन नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के पूर्व डायरेक्टर Joe Kent पर भी ट्रंप ने टिप्पणी की और कहा कि उनका जाना ठीक हुआ। जो केंट का कहना है कि ईरान से अमेरिका को इतना बड़ा खतरा नहीं था, और ट्रंप ने इजरायल के दबाव में आकर यह सैन्य कदम उठाया।
अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं: ट्रंप
Donald Trump ने साफ कहा कि अमेरिका अभी ईरान के साथ चल रहे संघर्ष से पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने यूरोपीय देशों पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका को किसी की मदद की जरूरत नहीं है और वह अपने दम पर हालात संभाल सकता है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने अकेले ही ईरान की सैन्य ताकत को काफी हद तक कमजोर कर दिया है।
उनके अनुसार, ईरान की वायुसेना और नौसेना अब पहले जैसी मजबूत नहीं रही, और वहां के टॉप लीडर को भी बड़ा नुकसान हुआ है। इसके अलावा, उन्होंने NATO की आलोचना करते हुए इसे “एकतरफा व्यवस्था” बताया। उनका कहना था कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा पर अरबों डॉलर खर्च करता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वही देश उसका साथ नहीं देते। उन्होंने इसे नाटो की बड़ी गलती बताया।
नाटो क्या है?
NATO का पूरा नाम नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन है। यह दुनिया का सबसे बड़ा और ताकतवर सैन्य गठबंधन माना जाता है, जिसमें यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कई देश शामिल हैं। इसकी शुरुआत साल 1949 में हुई थी। उस समय Soviet Union (सोवियत संघ) का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा था, जिससे पश्चिमी देशों को खतरा महसूस हो रहा था। इसलिए अपनी सुरक्षा के लिए इन देशों ने मिलकर नाटो बनाया। शीत युद्ध (Cold War) के दौरान यह गठबंधन पश्चिमी यूरोप की सुरक्षा के लिए बहुत अहम रहा। बाद में 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद भी नाटो खत्म नहीं हुआ, बल्कि इसमें पूर्वी यूरोप के कई नए देश शामिल होते गए।
नाटो की सबसे खास बात यह है कि अगर इसके किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाता है, और सभी मिलकर उसका जवाब देते हैं। आज के समय में नाटो के 32 सदस्य देश हैं, जिनमें United States, United Kingdom, France, Germany, Italy, Spain, Poland, Turkey, Canada जैसे देश शामिल हैं। हाल ही में Finland (2023) और Sweden (2024) भी इसमें जुड़ गए हैं।
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