Iran-US War: ईरान युद्ध के बीच ट्रंप बोले-आयरलैंड संग मजबूत होंगे व्यापारिक रिश्ते

प्रेसिडेंट ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच बड़ा बयान दिया। उन्‍होंने कहा,'आयरलैंड के साथ ट्रेड संबंध बढ़ाने की योजना' है। उन्‍होंने 'हॉर्मुज पर मिडिल ईस्ट से मजबूत समर्थन मिलने की बात कही।

Mar 18, 2026 - 09:38
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Iran-US War: ईरान युद्ध के बीच ट्रंप बोले-आयरलैंड संग मजबूत होंगे व्यापारिक रिश्ते
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यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्‍ड ट्रंप ने मंगलवार को आयरलैंड के साथ ट्रेड संबंध बढ़ाने की योजना पर जोर दिया। ET NOW स्‍वदेश के अनुसार, प्रेसिडेंट ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच बड़ा बयान दिया। उन्‍होंने कहा,'आयरलैंड के साथ ट्रेड संबंध बढ़ाने की योजना' है। उन्‍होंने 'हॉर्मुज पर मिडिल ईस्ट से मजबूत समर्थन मिलने की बात कही। कहा, कि नाटो बड़ी गलती कर रहा है। अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी देश ईरान युद्ध में सैन्य हस्तक्षेप से बचते हुए कूटनीति और शांति पर जोर दे रहे हैं। ब्रिटेन के बाद नाटो के दो अन्य सदस्य देशों फ्रांस और कनाडा ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं देने का फैसला किया है।

फ्रांस-कनाडा का जंग में शामिल होने से इनकार

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान युद्ध में शामिल होने से इनकार किया। कहा, 'हम इस संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में फ्रांस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने या मुक्त कराने के किसी भी सैन्य अभियान में भाग नहीं लेगा।' उन्होंने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि जैसे ही क्षेत्र में तनाव कम होगा और बमबारी रुक जाएगी। फ्रांस अन्य देशों के साथ मिलकर समुद्री जहाजों की सुरक्षा के लिए एस्कॉर्ट सिस्टम की जिम्मेदारी निभाने को तैयार है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा ने भी साफ कर दिया है कि वह इस युद्ध में शामिल नहीं होगा। कनाडा की विदेश मंत्री का साफतौर पर कहना है, कि कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने से पहले उनके देश के साथ कोई बातचीत नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि कनाडा की प्राथमिकता पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कहा कि मौजूदा संकट का समाधान केवल कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव होगा।

क्‍या है नाटो?

नाटो यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO)।जोकि दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली सैन्य गठबंधन है। इसमें यूरोप और उत्तरी अमेरिका के देश शामिल हैं। इसकी स्‍थापना तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) के बढ़ते प्रभाव और संभावित हमले से पश्चिमी देशों की रक्षा करने के लिए हुई थी। जानकारी के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1949 में इसकी स्थापना की गई थी।अमेरिका और सोवियत संघ के बीच जारी कोल्ड वॉर के दौरान यह पश्चिमी यूरोप का मुख्य रक्षा कवच के तौर पर काम करता रहा। साल 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद भी नाटो बना रहा। इस दौरान पूर्वी यूरोप के कई अन्य देश इस सैन्य गठबंधन में शामिल हो गए।

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