नलजल योजना में अनियमितताओं पर जांच टीम पर भड़के ग्रामीण:PHE दफ्तर के बाहर ही रात गुजारी; विभाग की टीम को 'घर की जांच' बताया
झाबुआ जिले में नलजल योजनाओं में अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन जारी है। आंदोलनकारियों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के दफ्तर के बाहर धरना दिया है और विभाग की ओर से गठित जांच दल को अस्वीकार कर दिया है। ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर कार्यालय के बाहर ही रात गुजार रहे हैं। यह प्रदर्शन पहले 9 मार्च को भी हुआ था, जिसे जांच दल गठित करने के आश्वासन पर समाप्त कर दिया गया था। हालांकि, एक हफ्ते बीत जाने के बाद भी टीम का गठन नहीं हुआ, जिसके बाद मंगलवार को ग्रामीणों ने फिर से दफ्तर के बाहर धरना शुरू कर दिया। इस बार कार्यालय के गेट पर ताला लगा दिया गया था, जिससे वे अंदर नहीं जा सके। आंदोलनकारियों ने टीम को किया खारिज कलेक्टर नेहा मीना के निर्देश पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री जितेंद्र मावी ने मंगलवार शाम को एक जांच दल का गठन किया। हालांकि, ग्रामीण और आंदोलनकारी इस टीम को मानने को तैयार नहीं हैं। विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, थांदला के लिए सहायक यंत्री दयालु राठौड़ के साथ उपयंत्री एस.के. तिवारी और रविंद्र सिसोदिया को जिम्मेदारी दी गई है। पेटलावद में राहुल सोलंकी, अंतरसिंह मंडलोई और अतुल पाटीदार की टीम बनाई गई है। वहीं, झाबुआ क्षेत्र के लिए शैलेश बघेल, बानसिंह बामनिया और कैलाश बबेरिया को नियुक्त किया गया है, जिन्हें 14 दिनों के भीतर निरीक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। “घर की जांच नहीं चलेगी”-निष्पक्ष जांच की मांग विभाग की इस कार्रवाई पर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे परमजीत सिंह ने कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि जिस विभाग के काम पर सवाल उठाए गए हैं, उसी के अधिकारी निष्पक्ष जांच कैसे कर सकते हैं। आंदोलनकारियों ने इस टीम को 'घर की जांच' करार देते हुए इसे पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। कार्यालय के बाहर किसानों ने जमकर नारेबाजी की ग्रामीणों की मांग है कि जांच दल में राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया जाए ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे और भ्रष्टाचार की हकीकत सामने आ सके। किसान अभी भी कार्यालय के बाहर डटे हुए हैं और जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। आंदोलनकारी किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे वहीं डटे रहेंगे।
झाबुआ जिले में नलजल योजनाओं में अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन जारी है। आंदोलनकारियों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के दफ्तर के बाहर धरना दिया है और विभाग की ओर से गठित जांच दल को अस्वीकार कर दिया है। ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर कार्यालय के बाहर ही रात गुजार रहे हैं। यह प्रदर्शन पहले 9 मार्च को भी हुआ था, जिसे जांच दल गठित करने के आश्वासन पर समाप्त कर दिया गया था। हालांकि, एक हफ्ते बीत जाने के बाद भी टीम का गठन नहीं हुआ, जिसके बाद मंगलवार को ग्रामीणों ने फिर से दफ्तर के बाहर धरना शुरू कर दिया। इस बार कार्यालय के गेट पर ताला लगा दिया गया था, जिससे वे अंदर नहीं जा सके। आंदोलनकारियों ने टीम को किया खारिज कलेक्टर नेहा मीना के निर्देश पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री जितेंद्र मावी ने मंगलवार शाम को एक जांच दल का गठन किया। हालांकि, ग्रामीण और आंदोलनकारी इस टीम को मानने को तैयार नहीं हैं। विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, थांदला के लिए सहायक यंत्री दयालु राठौड़ के साथ उपयंत्री एस.के. तिवारी और रविंद्र सिसोदिया को जिम्मेदारी दी गई है। पेटलावद में राहुल सोलंकी, अंतरसिंह मंडलोई और अतुल पाटीदार की टीम बनाई गई है। वहीं, झाबुआ क्षेत्र के लिए शैलेश बघेल, बानसिंह बामनिया और कैलाश बबेरिया को नियुक्त किया गया है, जिन्हें 14 दिनों के भीतर निरीक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। “घर की जांच नहीं चलेगी”-निष्पक्ष जांच की मांग विभाग की इस कार्रवाई पर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे परमजीत सिंह ने कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि जिस विभाग के काम पर सवाल उठाए गए हैं, उसी के अधिकारी निष्पक्ष जांच कैसे कर सकते हैं। आंदोलनकारियों ने इस टीम को 'घर की जांच' करार देते हुए इसे पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। कार्यालय के बाहर किसानों ने जमकर नारेबाजी की ग्रामीणों की मांग है कि जांच दल में राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया जाए ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे और भ्रष्टाचार की हकीकत सामने आ सके। किसान अभी भी कार्यालय के बाहर डटे हुए हैं और जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। आंदोलनकारी किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे वहीं डटे रहेंगे।